दशक सहावा : देवशोधन : समास पांचवा : मायाब्रह्मनिरूपण

समास पांचवा : मायाब्रह्मनिरूपण || .५ ||
॥श्रीराम॥ श्रोते पुसती ऐसें माया ब्रह्म तें कैसें |
श्रोत्या  वक्तयाच्या  मिसें निरूपण ऐका  ||||
ब्रह्म निर्गुण निराकार माया सगुण साकार |
ब्रह्मासि  नाहीं पारावार मायेसि  आहे ||||
ब्रह्म निर्मळ निश्चळ माया चंचळ चपळ |
ब्रह्म निरोपाधी केवळ माया उपाधिरूपी ||||
माया दिसे ब्रह्म दिसेना माया भासे ब्रह्म भासेना |
माया  नासे  ब्रह्म  नासेना कल्पांतकाळीं ||||
माया रचे ब्रह्म रचेना माया खचे ब्रह्म खचेना |
माया  रुचे  ब्रह्म  रुचेना  |  अज्ञानासी ||||
माया उपजे ब्रह्म उपजेना माया मरे ब्रह्म
मरेना माया धरे ब्रह्म धरेना धारणेसी ||||
माया फुटे ब्रह्म फुटेना माया तुटे ब्रह्म तुटेना |
माया  विटे  ब्रह्म  विटेना अविनाश तें ||||
माया विकारी  ब्रह्म  निर्विकारी माया  सर्व  करी ब्रह्म
कांहींच न करी माया नानारूपें धरी ब्रह्म तें अरूप ||||
माया पंचभूतिक अनेक ब्रह्म तें शाश्वत येक |
मायाब्रह्माचा विवेक विवेकी  जाणती  ||||
माया लाहान ब्रह्म थोर माया असार ब्रह्म
सार माया अर्ति पार ब्रह्मासी नाहीं ||१०||
सकळ माया विस्तारली ब्रह्मस्थिति अछ्यादली |
परी  ते  निवडूनि  घेतली साधुजनीं  ||११||
गोंडाळ सांडून नीर घेइजे नीर सांडूनि क्षीर सेविजे |
माया  सांडूनि  अनुभविजे  |  ब्रह्म  तैसें  ||१२||
ब्रह्म आकाशाऐसें निवळ माया वसुंधरा डहुळ |
ब्रह्म सूक्ष्म केवळ माया  स्थूळरूपी  ||१३||
ब्रह्म तें अप्रत्यक्ष असे माया ते प्रत्यक्ष दिसे |
ब्रह्म तें समचि असे माया ते विषमरूपी ||१४||
माया लक्ष ब्रह्म अलक्ष माया साक्ष ब्रह्म असाक्ष |
मायेमध्यें दोनि पक्ष ब्रह्मीं पक्षचि नाहीं ||१५||
माया  पूर्वपक्ष  ब्रह्म सिद्धांत माया  असंत  ब्रह्म
संत ब्रह्मासि नाहीं करणें हेत मायेसि आहे ||१६||
ब्रह्म  अखंड  घनदाट माया  पंचभूतिक  पोचट |
ब्रह्म तें निरंतर निघोट माया ते जुनी जर्जरी ||१७||
माया घडे ब्रह्म घडेना माया पडे ब्रह्म पडेना |
माया विघडे ब्रह्म विघडेना जैसें तैसें ||१८||
ब्रह्म असतचि असे माया निरसितांच निरसे |
ब्रह्मास  कल्पांत  नसे मायेसि  आहे ||१९||
माया  कठिण  ब्रह्म  कोमळ  |  माया अल्प ब्रह्म
विशाळ माया नासे सर्वकाळ ब्रह्मचि असे ||२०||
वस्तु नव्हे बोलिजे ऐसी माया जैसी बोलिजे तैसी |
काळ  पावेना  वस्तुसी  |  मायेसी  झडपी  ||२१||
नाना रूप नाना रंग तितुका मायेचा प्रसंग |
माया  भंगे  ब्रह्म  अभंग जैसें तैसें ||२२||
आतां असो हा विस्तार चालत जातें सचराचर |
तितुकी माया परमेश्वर सबाह्यअभ्यंतरीं ||२३||
सकळ उपाधींवेगळा तो परमात्मा निराळा |
जळीं असोनि नातळे जळा आकाश जैसें ||२४||
मायाब्रह्माचें विवरण करितां चुके जन्ममरण |
संतांस  गेलियां  शरण मोक्ष  लाभे  ||२५||
अरे या संतांचा महिमा बोलावया नाहीं सीमा |
जयांचेनि  जगदात्मा  |  अंतरचि  होय  ||२६||
इति श्रीदासबोधे गुरुशिष्यसंवादे मायाब्रह्म
निरूपणनाम  समास  पांचवा  || .५ ||

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