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दशक आठवा : समास दहावा : सुन्यत्वनिर्शन

समास दहावा : सुन्यत्वनिर्शन || ८.१० || ॥श्रीराम॥ जनाचे  अनुभव  पुसतां | कळहो  उठिला अवचिता | हा कथाकल्लोळ श्रोतां | कौतुकें ऐकावा ||१|| येक म्हणती हा संसारु | करितां पाविजे पैलपारु | आपला  नव्हे  कीं  जोजारु | जीव  देवाचे ||२|| येक म्हणती हें न घडे | लोभ  येऊन  आंगीं जडे | पोटस्तें करणें घडे | सेवा कुटुंबाची ||३|| येक म्हणती स्वभावें | संसार करावा सुखें नावें | कांहीं  दान  पुण्य  करावें | सद्‍गतीकारणें ||४|| येक म्हणती संसार खोटा | वैराग्यें घ्यावा देशवटा | येणें  स्वर्गलोकींच्या  वाटा | मोकळ्या  होती  ||५|| येक म्हणती कोठें जावें | वेर्थचि कासया हिंडावें | आपुलें आश्रमी असावें | आश्रमधर्म करूनी ||६|| येक म्हणती कैंचा धर्म | अवघा होतसे अधर्म | ये  संसारीं  नाना  कर्म  |  करणें  लागे ||७|| येक म्हणती बहुतांपरी | वासना असावी बरी | येणेंचि  तरिजे  संसारीं  |  अनयासें  ||८|| येक म्हणती कारण भाव | भावेंचि पाविजे देव | येर हें अवघेंचि वाव | गथागोवी ||९|| येक म्हणती वडिले जीवीं | अवघीं देवचि मानावीं | मायेबापें  पूजीत  जावीं  |  येकाभावें  ||१०|| येक म्हणती देवब्राह्मण | त्यांचें करावें पूजन | मायेबाप  नारायेण  …

दशक आठवा : समास नववा : सिद्धलक्षण

समास नववा : सिद्धलक्षण || ८.९ || ॥श्रीराम॥ अंतरी गेलियां अमृत | बाह्य काया लख- लखित | अंतरस्थिति बाणतां संत | लक्षणें कैसीं ||१|| जालें आत्मज्ञान बरवें | हे कैसेनि पां जाणावें | म्हणोनि बोलिलीं स्वभावें | साधुलक्षणें ||२|| ऐक सिद्धांचे लक्षण | सिद्ध म्हणिजे स्वरूप जाण | तेथें  पाहातां  वेगळेपण  |  मुळींच  नाहीं  ||३|| स्वरूप  होऊन  राहिजे | तया  नाव  सिद्ध बोलिजे | सिद्धस्वरूपींच साजे | सिद्धपण ||४|| वेदशास्त्रीं जें प्रसिद्ध | सस्वरूप  स्वतसिद्ध | तयासिच बोलिजे सिद्ध | अन्यथा न घडे ||५|| तथापी बोलों कांहीं येक | साधकास कळाया विवेक | सिद्धलक्षणाचें  कौतुक | तें  हें  ऐसें  असे  ||६|| अंतरस्थित स्वरूप जाली | पुढें काया कैसी वर्तली | जैसी  स्वप्नीची  नाथिली  |  स्वप्नरचना  ||७|| तथापी सिद्धाचें लक्षण | कांहीं करूं निरूपण | जेणें  बाणे  अंतर्खूण  |  परमार्थाची  ||८|| सदा स्वरूपानुसंधान | हें मुख्य साधूचें लक्षण | जनीं  असोन  आपण  |  जनावेगळा  ||९|| स्वरूपीं दृष्टी पडतां | तुटोन गेली संसारचिंता | पुढें  लागली  ममता  |  निरूपणाची  ||१०|| हें  साधकाचें  लक्षण  |  परी  सिद्धाआंगीं असे जाण | सिद्धलक्षण साधकेंविण …